UPSSSC लोअर मेन्स के लिए मात्रा-पहचान और प्रयोग की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए मात्रा-पहचान और प्रयोग की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।
| स्वर | मात्रा | व्यंजन के साथ उदाहरण |
|---|---|---|
| अ | - | क |
| आ | ा | का |
| इ | ि | कि |
| ई | ी | की |
| उ | ु | कु |
| ऊ | ू | कू |
| ए | े | के |
| ऐ | ै | कै |
| ओ | ो | को |
| औ | ौ | कौ |
व्यंजन के साथ स्वर के जुड़े हुए रूप को 'मात्रा' कहते हैं।व्यंजन के साथ स्वर के जुड़े हुए रूप को 'मात्रा' कहते हैं।
ह्रस्व (लघु) मात्राएँ: अ, इ, उ, ऋ। इनका उच्चारण कम समय में होता है।ह्रस्व (लघु) मात्राएँ: अ, इ, उ, ऋ। इनका उच्चारण कम समय में होता है।
दीर्घ (गुरु) मात्राएँ: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। इनका उच्चारण ह्रस्व से दोगुना समय लेता है।दीर्घ (गुरु) मात्राएँ: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। इनका उच्चारण ह्रस्व से दोगुना समय लेता है।
'र' व्यंजन में उ और ऊ की मात्रा नीचे नहीं, बल्कि बीच में लगती है।'र' व्यंजन में उ और ऊ की मात्रा नीचे नहीं, बल्कि बीच में लगती है।
अनुस्वार (ं): इसका उच्चारण नाक से होता है (जैसे: हंस, अंग)।अनुस्वार (ं): इसका उच्चारण नाक से होता है (जैसे: हंस, अंग)।
अनुनासिक (ँ): इसे चंद्रबिंदु कहते हैं, इसका उच्चारण नाक और मुख दोनों से होता है (जैसे: आँख, गाँव)।अनुनासिक (ँ): इसे चंद्रबिंदु कहते हैं, इसका उच्चारण नाक और मुख दोनों से होता है (जैसे: आँख, गाँव)।
विसर्ग का उच्चारण आधे 'ह' की तरह होता है। यह मुख्य रूप से तत्सम शब्दों में प्रयुक्त होता है।विसर्ग का उच्चारण आधे 'ह' की तरह होता है। यह मुख्य रूप से तत्सम शब्दों में प्रयुक्त होता है।
उदाहरण: प्रातः, स्वतः, दुःख, निःसंकोच।उदाहरण: प्रातः, स्वतः, दुःख, निःसंकोच।
जब किसी व्यंजन को स्वर रहित लिखना हो, तो उसके नीचे हलंत (्) लगाया जाता है।जब किसी व्यंजन को स्वर रहित लिखना हो, तो उसके नीचे हलंत (्) लगाया जाता है।
क्ष, त्र, ज्ञ, श्र संयुक्त व्यंजन हैं। इनमें मात्रा लगाने का नियम सामान्य व्यंजनों जैसा ही है।क्ष, त्र, ज्ञ, श्र संयुक्त व्यंजन हैं। इनमें मात्रा लगाने का नियम सामान्य व्यंजनों जैसा ही है।
उदाहरण: क्षा (क्षात्र), त्री (त्रिशूल), ज्ञा (ज्ञान), श्रु (श्रुति)।उदाहरण: क्षा (क्षात्र), त्री (त्रिशूल), ज्ञा (ज्ञान), श्रु (श्रुति)।
1. कमल (अ), 2. माला (आ), 3. किताब (ि), 4. नदी (ी), 5. पुत्र (ु), 6. फूल (ू), 7. केला (े), 8. पैसा (ै), 9. मोर (ो), 10. कौआ (ौ), 11. चंद्र (ं), 12. आँख (ँ), 13. अतः (:) ... (इसी प्रकार अन्य शब्द अभ्यास करें)।1. कमल (अ), 2. माला (आ), 3. किताब (ि), 4. नदी (ी), 5. पुत्र (ु), 6. फूल (ू), 7. केला (े), 8. पैसा (ै), 9. मोर (ो), 10. कौआ (ौ), 11. चंद्र (ं), 12. आँख (ँ), 13. अतः (:) ... (इसी प्रकार अन्य शब्द अभ्यास करें)।
1. 'र' वाले शब्दों में भ्रमित न हों: 'रु' (छोटा उ) और 'रू' (बड़ा ऊ) का अंतर ध्यान रखें।1. 'र' वाले शब्दों में भ्रमित न हों: 'रु' (छोटा उ) और 'रू' (बड़ा ऊ) का अंतर ध्यान रखें।
2. अनुनासिक और अनुस्वार में भेद पहचानें: जहाँ उच्चारण केवल नाक से हो वहाँ अनुस्वार, जहाँ मुख और नाक दोनों से हो वहाँ अनुनासिक।2. अनुनासिक और अनुस्वार में भेद पहचानें: जहाँ उच्चारण केवल नाक से हो वहाँ अनुस्वार, जहाँ मुख और नाक दोनों से हो वहाँ अनुनासिक।
3. शब्द शुद्धि में मात्राओं का ध्यान रखें: 'कवयित्री', 'आशीर्वाद', 'उज्ज्वल' जैसे शब्दों में मात्राओं का विशेष अभ्यास करें।3. शब्द शुद्धि में मात्राओं का ध्यान रखें: 'कवयित्री', 'आशीर्वाद', 'उज्ज्वल' जैसे शब्दों में मात्राओं का विशेष अभ्यास करें।